बुझे चराग़ से उम्मीद-ए-रोशनी करना

किसी हजर के सामने है बंदगी करना

बुलंद निगाहों से हम ने लड़ी लड़ाई जब
झुकी निगाह से गिरके क्या ख़ुदकशी करना

गरीब लोगों को इस कि कहाँ इज़ाजत है
अमीर घर में मोहब्बत की नौकरी करना

जो रात होगी नज़र से उसे गिरा देगी
दिए की आफ़ताब से ये हम सेरी करना

ना जाने इस से तुम्हें क्या ए'जाज़ मिलता है
हमेशा शान में मेरी, तेरा कमी करना

— Ali Mohammed Shaikh

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