ये उन की आँखों में अक्सर दिखाई देता है
कि हम को आप से बेहतर दिखाई देता है
अजीब हैं मिरी आँखें उसी को ढूँढती हैं
जो बंद आँखों से बेहतर दिखाई देता है
जिसे निकाल के लाए थे रौशनी में हम
अब उस का साया भी हम पर दिखाई देता है
छुपेगा क्यूँ कोई अपनी बनाई दुनिया से
दिखाई देता है अक्सर दिखाई देता है
कभी कभी मैं ये आँखें अमल में लाता हूँ
ज़ियादा-तर मुझे छू कर दिखाई देता है
— Amit Bajaj















