
न कह पाया जो मैं तुम सेे कभी गर तुम वो कह लो तो
कि सौ ख़ुशियों में तुम छोटा-सा गर इक ग़म भी सह लो तो
मैं यूँ ही उम्र भर गाता रहूँगा प्रेम के सरगम
अगर तुम साथ मेरे आग के दरिया में बह लो तो
— Rehaan
Other sher from the same pen
Shers of gham.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling