jhuls rahi hai agan men duniya ise bujhaao gale lagao | झुलस रही है अगन में दुनिया इसे बुझाओ गले लगाओ

  - Anmol Mishra

झुलस रही है अगन में दुनिया इसे बुझाओ गले लगाओ
पड़े हुए जो दिलों में छाले नहीं दुखाओ गले लगाओ

भरी है नफ़रत ख़िजाँ ने गुलशन में पात सूखे बिखर रहे हैं
सुनो सभी अब मुहब्बतों की बहार लाओ गले लगाओ

ये दोस्त दुनिया ये जालसाज़ी कदम कदम पर करे है ठोकर
तेरा सुदामा गिरा कन्हैया इसे उठाओ गले लगाओ

जो टूट बैठे थकन के मारे जो हार बैठे हैं आधे रस्ते
सुनो ऐ मंज़िल ज़रा बिचारों के पास आओ गले लगाओ

तुम्हारी सोहबत नसीब होती उन्हें भी जो बदनसीब निकले
कभी तो अपने करीब जानाँ हमें बिठाओ गले लगाओ

उठो ज़मीं से झुको ज़मीं पर गिरो ज़मीं तक ऐ आसमानों
ज़मीन से ही तुम्हारी हस्ती ज़मीं बनाओ गले लगाओ

कबाड़ घर का बुज़ुर्ग कोना लगे हैं जाले धुएँ में काले
ये डर रहा है सिहर रहा है तरस तो खाओ गले लगाओ

  - Anmol Mishra

Motivational Shayari in Hindi

Our suggestion based on your choice

More by Anmol Mishra

As you were reading Shayari by Anmol Mishra

Similar Writers

our suggestion based on Anmol Mishra

Similar Moods

As you were reading Motivational Shayari in Hindi Shayari