"काइनात"काश जज़्बात का भीकोई मसावात होताE बराबर mc² की मानिंदजहाँ E एहसास होm मोहब्बतऔर c तेरे छोड़ जाने की रफ़्तारतो मैं साबित कर देताकि तेरा जाना महज़ जुदाई नहींबल्कि एक नफ़स मेंबिखरती पूरी काइनात थी— Arman Habib