गिरने दें बिजलियाँ कोई साया न कीजिए
अपनी निगाह-ए-नाज़ का पर्दा न कीजिए
कितनी ही मुश्किलों से लबों पर हँसी खिली
देखें हँसी हँसी में तो रोया न कीजिए
कुछ तो लिहाज़ कीजिए इस आशनाई का
हमको किसी मलाल में डाला न कीजिए
हम आप को पसंद नहीं हम सेे बोलिए
ग़ैरों में ताने मार के रुसवा न कीजिए
हमको मिला न कीजिए राह-ए-वफ़ा पे आप
मंज़िल का लुत्फ़ देखिए फीका न कीजिए
कुछ भी किसी ग़रीब का जाता नहीं मगर
सिक्कों को खिड़कियों से यूँँ फेंका न कीजिए
वाइज़ की आदतें तो ये जाती सी जाएगी
सय्यद जी आप तो वहाँ बैठा न कीजिए
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