main neend ke aiwaan men hairaan tha kal shab | मैं नींद के ऐवान में हैरान था कल शब

  - Aziz Nabeel

मैं नींद के ऐवान में हैरान था कल शब
इक ख़्वाब मिरी आँख का मेहमान था कल शब

किस ग़म में बिखरते रहे आकाश पे तारे
क्यूँँ चाँद परेशान परेशान था कल शब

हर आन कोई याद चमकती रहे दिल में
हर लम्हा कोई शोर था, तूफ़ान था कल शब

क्या जानिए क्या उस की नदामत का सबब था
क्या जानिए क्यूँँ मैं भी पशेमान था कल शब

ठहरी हुई लगती थी हवा और हर इक शय
जैसे कि बदन वक़्त का बे-जान था कल शब

इक नूर सा फैला रहा उस सम्त से इस सम्त
जुगनू मिरी उम्मीद की पहचान था कल शब

फिर सुब्ह-ए-मुनव्वर की बशारत हुई मुझ को
फिर दूर तलक रास्ता आसान था कल शब

  - Aziz Nabeel

Husn Shayari

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