मेरे आज़ाद वतन तेरी बहारों को सलाम
तेरी पुर-कैफ़ फ़ज़ा तेरे नज़ारों को सलाम
जिन की ख़िदमात से चमकी है वतन की क़िस्मत
जगमगाते हुए उन चाँद सितारों को सलाम
कारवाँ जिन का लुटा राह में आज़ादी की
क़ौम का मुल्क का उन दर्द के मारों को सलाम
लिख गए अपने लहू से जो वफ़ा के क़िस्से
उन शहीदों पे दरूद उन के मज़ारों को सलाम
'ताहिरा' सालगिरह आज है आज़ादी की
हिन्द के ख़ुर्द-ओ-कलाँ साथियों प्यारों को सलाम
— Bano Tahira Sayeed















