mirii nazar men KHaak tere aaine pe gard hai | मिरी नज़र में ख़ाक तेरे आइने पे गर्द है

  - Bashir Badr

मिरी नज़र में ख़ाक तेरे आइने पे गर्द है
ये चाँद कितना ज़र्द है ये रात कितनी सर्द है

कभी कभी तो यूँँ लगा कि हम सभी मशीन हैं
तमाम शहर में न कोई ज़न न कोई मर्द है

ख़ुदा की नज़्मों की किताब सारी काएनात है
ग़ज़ल के शे'र की तरह हर एक फ़र्द फ़र्द है

हयात आज भी कनीज़ है हुज़ूर-ए-जब्र में
जो ज़िंदगी को जीत ले वो ज़िंदगी का मर्द है

इसे तबर्रुक-ए-हयात कह के पलकों पर रखूँ
अगर मुझे यक़ीन हो ये रास्ते की गर्द है

वो जिन के ज़िक्र से रगों में दौड़ती थीं बिजलियाँ
उन्हीं का हाथ हम ने छू के देखा कितना सर्द है

  - Bashir Badr

Gaon Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Bashir Badr

As you were reading Shayari by Bashir Badr

Similar Writers

our suggestion based on Bashir Badr

Similar Moods

As you were reading Gaon Shayari Shayari