गुफ़्तुगू जो तू यूँँ नहीं करता

मुझ को आबाद क्यूँ नहीं करता

जो हुआ है ये इश्क़ है तो फिर
मुझ को बर्बाद क्यूँ नहीं करता

बोलते है यहाँ सभी मुझ से
पर कोई बात क्यूँ नहीं करता

क्यूँ तू झुकता है उस के आगे यार
उस से दो हाथ क्यूँ नहीं करता

मुझ को भी डाँट देता है वो शख़्स
उस के आगे मैं चूँ नहीं करता

मुझ को अपना कहे है तू तो फिर
मेरे घर आ जा क्यूँ नहीं करता

गाँव के लड़कों जैसी बदमाशी
शहर का लड़का क्यूँ नहीं करता

धोखे जो खाता है तू इतने यार
प्यार तू माँ से क्यूँ नहीं करता

बोलता है यहाँ सभी से वो
मुझ से फिर बात क्यूँ नहीं करता

— Brajnabh Pandey

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