रक़ीबों से बहुत वो आज कल इक़रार करता है
मगर मुझको सभी के सामने इनकार करता है
नज़रअंदाज़ करता है वो पहले से ज़ियादा अब
ज़माना जानता है मेरे दिल पर वार करता है
मुझे बस देख कर अपनी नज़र को मोड़ लेता है
सितम यह है न वो मुझ से कभी दीदार करता है
वो मेरी ज़िंदगी में लौट कर वापस न आएगा
बुलाने की उसे कोशिश भी दिल सौ बार करता है
तुम्हारी बात पर मुझको भरोसा है नहीं 'दानिश'
जो तुम कहते हो वो अब भी तुम्हीं से प्यार करता है
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