raqeebon se bahut vo aaj kal iqraar karta hai | रक़ीबों से बहुत वो आज कल इक़रार करता है

  - Danish Balliavi

रक़ीबों से बहुत वो आज कल इक़रार करता है
मगर मुझको सभी के सामने इनकार करता है

नज़रअंदाज़ करता है वो पहले से ज़ियादा अब
ज़माना जानता है मेरे दिल पर वार करता है

मुझे बस देख कर अपनी नज़र को मोड़ लेता है
सितम यह है न वो मुझ से कभी दीदार करता है

वो मेरी ज़िंदगी में लौट कर वापस न आएगा
बुलाने की उसे कोशिश भी दिल सौ बार करता है

तुम्हारी बात पर मुझको भरोसा है नहीं 'दानिश'
जो तुम कहते हो वो अब भी तुम्हीं से प्यार करता है

  - Danish Balliavi

Baaten Shayari

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