"ख़ूब-सूरत अजनबी"

मिला है सफ़र में मुझे एक चेहरा
बहुत ख़ूब-सूरत बहुत ख़ूब-सूरत
ख़ुदा ने बनाया है जो उस का मुखड़ा
बहुत ख़ूब-सूरत बहुत ख़ूब-सूरत

मुसलसल उसी को फ़क़त तक रहा हूँ
उसी पर मैं इक नज़्म भी कह रहा हूँ
वो रक्खी है जो अपने सर पर दुपट्टा
बहुत ख़ूब-सूरत बहुत ख़ूब-सूरत

बहुत क़ातिलाना है उस की निगाहें
बहुत जानलेवा है उस की अदाएँ
लगाई है जो उस ने आँखों पे चश्मा
बहुत ख़ूब-सूरत बहुत ख़ूब-सूरत

उसे हूर कह के पुकारा है मैं ने
ज़रा गुफ़्तुगू कर के देखा है मैं ने
उसे बात करने का जो है तरीक़ा
बहुत ख़ूब-सूरत बहुत ख़ूब-सूरत

है मालूम 'दानिश' वो इक अजनबी है
मगर उस
में हरगिज़ न कोई कमी है
जो गुज़रा है उस का मेरे साथ लम्हा
बहुत ख़ूब-सूरत बहुत ख़ूब-सूरत

— Danish Balliavi

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