"बचपन की मुहब्बत"
तू था मेरे दिल का रहबर
तू कितने दिन याद आएगा
तू छोड़ गया है मुझ को पर
तू कितने दिन याद आएगा
हाँ प्यार हुआ था बचपन में
इक़रार हुआ था बचपन में
सुन बचपन का मेरे दिलबर
तू कितना ख़ुश है मेरे बिना
ये दिल रोता है तेरे बिना
तू था मंज़िल का राह-गुज़र
अब प्यार मुहब्बत है ही नहीं
रोने के सिवा अब कुछ भी नहीं
बस अश्कों से दामन है तर
तेरी यादें तड़पाती है
उलफ़त में आग लगाती है
कब लेगा तू 'दानिश' की ख़बर
— Danish Balliavi















