"तुम से बे-पनाह मोहब्बत"

मेरे नूर-ए-नज़र आ भी जा तू नज़र
कब सुनाएगा मुझ को तू अच्छी ख़बर

तेरा आशिक़ बेचारा परेशान है
तुझ से नाराज़ है और हैरान है
क़ासिद-ए-मोतबर ले जा मेरी ख़बर

तेरी नज़रों से मिलती हैं ख़ामोशियाँ
दिल में क्यूँ रखता है इतनी सरगोशियाँ
खोल दे अब ज़बाँ ऐ मेरे हम सफ़र

मेरे दिल की तमन्ना यहीं हैं सनम
मैं रहूँ साथिया बन के सातों जनम
बात हो जाए सच तू जो कह दे अगर

टूट कर मेरा दिल ये बिखर जाएगा
तू न होगा तो ''दानिश'' ये मर जाएगा
सूख जाएगा ये ज़िंदगी का शजर

— Danish Balliavi

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Sach Shayari

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