जिन के हम नाम भूल जाते हैं
फिर वो चेहरों से याद आते हैं
देख ले वो जो मुस्कुरा के मुझे
देर तक हम भी मुस्कुराते हैं
याद बातें पुरानी करने से
ज़ख़्म फिर से नए हो जाते हैं
इश्क़ कर के यही हुआ हासिल
बीते लम्हें मुझे सताते हैं
हैं जो वीरां शज़र, परिंदों से
वक़्त से पहले सूख जाते हैं
— Deepak Maurya















