saath daryaon ka paani hai mire kooze men | सात दरियाओं का पानी है मिरे कूज़े में

  - Dilawar Ali Aazar

सात दरियाओं का पानी है मिरे कूज़े में
बंद इक ताज़ा कहानी है मिरे कूज़े में

तुम उसे पानी समझते हो तो समझो साहब
ये समुंदर की निशानी है मिरे कूज़े में

मेरे आबा ने जवानी में मुझे सौंपा था
मेरे आबा की जवानी है मिरे कूज़े में

देखने वालो नए नक़्श मिलेंगे तुम को
सोचने वालो गिरानी है मिरे कूज़े में

जाने किस ख़ाक से ये ज़र्फ़ हुआ है ता'मीर
जाने किस घाट का पानी है मिरे कूज़े में

आन की आन गुज़रता है ज़माना इस पर
वक़्त की नक़्ल-ए-मकानी है मिरे कूज़े में

चारों सम्तों में कोई शय भी अगर है मौजूद
इस ने वो ला के गिरानी है मिरे कूज़े में

क़र्ज़ है मुझ पे जो इक अक्स-ए-तमन्ना 'आज़र'
उस ने क्या शक्ल बनानी है मिरे कूज़े में

  - Dilawar Ali Aazar

Samundar Shayari

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