जब भी हो मुझ को थकन तुम को दु'आ देती हूँ
घर के कामों में मगन तुम को दु'आ देती हूँ
ऐसा लगता है मोहब्बत का ख़ुदा है उस में
देखती हूँ जो गगन तुम को दु'आ देती हूँ
डूबते चाँद के पाँव में मधुर साज़ हो जब
दिल में झाँके जो किरन तुम को दु'आ देती हूँ
सोचती रहती हूँ तुम को ही बिठा कर दिल में
ऐसी जागी है लगन तुम को दु'आ देती हूँ
वहशतों ने ही जलाया है 'दिया' तेरा बदन
चाँद जैसा हो ये मन तुम को दु'आ देती हूँ
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