कितना उस से फाँसला है ये न मुझ सेे पूछिये
कोई राब्ता या सिलसिला है ये न मुझ से पूछिये
जिस ने भी किया उस ने डुबोई है कश्ती अपनी
ये इश्क़ है कि जलजला है ये न मुझ से पूछिये
होश किसी बात का मुझ को नहीं है आजकल
बुरा क्या है,क्या भला है,ये न मुझ से पूछिये
शिकारी ने मार डाले परिंदे सभी उस शज़र के
फिर ये किस का घोंसला है ये न मुझ से पूछिये
उस के बिना बे-रंग सब और वो चाहिए भी नहीं
कैसा अजब ये मसअला है ये न मुझ से पूछिये
— Om Shukla















