मालूम है क्या करना है, कर जाएँगे
अगली गाड़ी आने तो दो,घर जाएँगे
इतना चूमा है, हम को गम-ए-फुर्कत ने
अपनी उम्र से पहले ही हम मर जाएँगे
दीवानों को न दिखलाना मेरी हालत
मुझ को देख कर वो बेचारे डर जाएँगे
मुस्कराने पे बनते हैं जो गालों में गड्ढे
इतना रोयेंगी आँखें, ये भर जाएँगे
जाने वाला है ,अब तो रोक लो 'ओम'
उस बिन अफसाने किस के दर जाएँगे
— Om Shukla















