मोहब्बतों का ख़याल रखना
कहीं न ऐसा हो बे-ध्यानी में
तुम हथेली को खोल डालो
हवाएँ साज़िश पे आन उतरीं
तो ख़ुश्क पत्तों सा हाल होगा
गुलाब-रुत का ज़वाल होगा
मोहब्बतों का ख़याल रखना
— Fakhira batool
कहीं न ऐसा हो बे-ध्यानी में
तुम हथेली को खोल डालो
हवाएँ साज़िश पे आन उतरीं
तो ख़ुश्क पत्तों सा हाल होगा
गुलाब-रुत का ज़वाल होगा
मोहब्बतों का ख़याल रखना
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