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SHER
किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा
अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा
Munawwar Rana
किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा — Munawwar Rana
SHER
बहन का प्यार जुदाई से कम नहीं होता
अगर वो दूर भी जाए तो ग़म नहीं होता
Unknown
बहन का प्यार जुदाई से कम नहीं होता अगर वो दूर भी जाए तो ग़म नहीं होता — Unknown
SHER
बिजली की तरह लचक रहे हैं लच्छे
भाई के है बांधी चमकती राखी
Firaq Gorakhpuri
बिजली की तरह लचक रहे हैं लच्छे भाई के है बांधी चमकती राखी — Firaq Gorakhpuri
SHER
ज़िंदगी भर की हिफ़ाज़त की क़सम खाते हुए
भाई के हाथ पे इक बहन ने राखी बाँधी
Unknown
ज़िंदगी भर की हिफ़ाज़त की क़सम खाते हुए भाई के हाथ पे इक बहन ने राखी बाँधी — Unknown
SHER
भाई बहनों की मोहब्बत का नशा मत पूछिए
बे-तकल्लुफ़ हो गए तो गुदगुदी तक आ गए
Iftikhar Falak Kazmi
भाई बहनों की मोहब्बत का नशा मत पूछिए बे-तकल्लुफ़ हो गए तो गुदगुदी तक आ गए — Iftikhar Falak Kazmi
NAZM
"राखी"
— Nazeer Akbarabadi
"राखी" चली आती है अब तो हर कहीं बाज़ार की राखी सुनहरी सब्ज़ रेशम ज़र्द और गुलनार की राखी बनी है गो कि नादिर ख़ूब हर सरदार की राखी सलोनों में अजब रंगीं है उस दिलदार की राखी न पहुँचे एक गुल को यार जिस गुलज़ार की राखी अयाँ है अब तो राखी भी चमन भी गुल भी शबनम भी झमक जाता है मोती और झलक जाता है रेशम भी तमाशा है अहा हा-हा ग़नीमत है ये आलम भी उठाना हाथ प्यारे वाह-वा टुक देख लें हम भी तुम्हारी मोतियों की और ज़री के तार की राखी मची है हर तरफ़ क्या क्या सलोनों की बहार अब तो हर इक गुल-रू फिरे है राखी बाँधे हाथ में ख़ुश हो हवस जो दिल में गुज़रे है कहूँ क्या आह मैं तुम को यही आता है जी में बन के बाम्हन, आज तो यारो मैं अपने हाथ से प्यारे के बाँधूँ प्यार की राखी हुई है ज़ेब-ओ-ज़ीनत और ख़ूबाँ को तो राखी से व-लेकिन तुम से ऐ जाँ और कुछ राखी के गुल फूले दिवानी बुलबुलें हों देख गुल चुनने लगीं तिनके तुम्हारे हाथ ने मेहंदी ने अंगुश्तों ने नाख़ुन ने गुलिस्ताँ की चमन की बाग़ की गुलज़ार की राखी अदा से हाथ उठते हैं गुल-ए-राखी जो हिलते हैं कलेजे देखने वालों के क्या क्या आह छिलते हैं कहाँ नाज़ुक ये पहुँचे और कहाँ ये रंग मिलते हैं चमन में शाख़ पर कब इस तरह के फूल खिलते हैं जो कुछ ख़ूबी में है उस शोख़-ए-गुल-रुख़्सार की राखी फिरें हैं राखियाँ बाँधे जो हर दम हुस्न के तारे तो उन की राखियों को देख ऐ जाँ चाव के मारे पहन ज़ुन्नार और क़श्क़ा लगा माथे उपर बारे 'नज़ीर' आया है बाम्हन बन के राखी बाँधने प्यारे बँधा लो उस से तुम हँस कर अब इस त्यौहार की राखी — Nazeer Akbarabadi
SHER
पिछले बरस भी हम ने कलाई सजाई थी
राखी के धागे आज भी कच्चे नहीं पड़े
Aalok Shrivastav
पिछले बरस भी हम ने कलाई सजाई थी राखी के धागे आज भी कच्चे नहीं पड़े — Aalok Shrivastav
SHER
मिरी बहनों से मिलना तो उन्हें पैग़ाम ये देना
कि भाई अब नहीं तो क्या ख़ुदाई तो सलामत है
Haider Khan
मिरी बहनों से मिलना तो उन्हें पैग़ाम ये देना कि भाई अब नहीं तो क्या ख़ुदाई तो सलामत है हुआ क्या जो के दुश्मन ने किया धड़ से अलग सर को लो बाँधो राखियाँ इस में कलाई तो सलामत है — Haider Khan
SHER
या रब मिरी दु'आओं में इतना असर रहे
फूलों भरा सदा मिरी बहना का घर रहे
Unknown
या रब मिरी दु'आओं में इतना असर रहे फूलों भरा सदा मिरी बहना का घर रहे — Unknown
SHER
गुलशन से कोई फूल मुयस्सर न जब हुआ
तितली ने राखी बाँध दी काँटे की नोक पर
Unknown
गुलशन से कोई फूल मुयस्सर न जब हुआ तितली ने राखी बाँध दी काँटे की नोक पर — Unknown
SHER
आस्था का रंग आ जाए अगर माहौल में
एक राखी ज़िंदगी का रुख़ बदल सकती है आज
Unknown
आस्था का रंग आ जाए अगर माहौल में एक राखी ज़िंदगी का रुख़ बदल सकती है आज — Unknown
SHER
याद आई जब मुझे 'फ़रहत' से छोटी थी बहन
मेरे दुश्मन की बहन ने मुझ को राखी बाँध दी
Ehsan Saqib
याद आई जब मुझे 'फ़रहत' से छोटी थी बहन मेरे दुश्मन की बहन ने मुझ को राखी बाँध दी — Ehsan Saqib
SHER
चली आती है अब तो हर कहीं बाज़ार की राखी
सुनहरी सब्ज़ रेशम ज़र्द और गुलनार की राखी
Nazeer Akbarabadi
चली आती है अब तो हर कहीं बाज़ार की राखी सुनहरी सब्ज़ रेशम ज़र्द और गुलनार की राखी — Nazeer Akbarabadi
SHER
बहन ने बाँध कर राखी बचा ली ज़िंदगी वर्ना
ज़रा सा वक़्त बाक़ी था हमारी नब्ज़ थमने में
Harsh saxena
बहन ने बाँध कर राखी बचा ली ज़िंदगी वर्ना ज़रा सा वक़्त बाक़ी था हमारी नब्ज़ थमने में — Harsh saxena
SHER
कभी कभी सभी त्यौहार याद आते हैं
तेरे बगैर कलाई उदास करती है
Vikas Rajput
कभी कभी सभी त्यौहार याद आते हैं तेरे बगैर कलाई उदास करती है — Vikas Rajput
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