"ज़िंदगी के रंग"
मुझे ज़िंदगी से गिला नहीं
मुझे आशिक़ी से गिला नहीं
मुझे सादगी से गिला नहीं
मुझे बेख़ुदी से गिला नहीं
मुझे कहकशाॅं से गिला नहीं
मुझे आसमाॅं से गिला नहीं
मुझे बस फ़क़त ये गिला रहा
मुझे हर ख़ुशी से गिला रहा
तेरी जुस्तुजु से मैं डर गया
मैं गुज़र गया, मैं बिखर गया
मेरा हाल कैसा ये हाल है
मैं तो इश्क़ इश्क़ में मर गया
तेरी यादें मुझ को सता रहीं
मेरी धड़कनों को बढ़ा रहीं
मैं कहाॅं हूँ मुझ को ख़बर नहीं
ये उदासियाॅं मुझे खा रहीं
— Hameed Sarwar Bahraichi















