थोड़े से मसाइल में गिरफ़्तार हैं हम लोग
दुनिया को ये लगता है गुनहगार हैं हम लोग
आब-ओ-हवा-ए-शहर ने नासाज़ किया यूँ
जैसे कि कई साल से बीमार हैं हम लोग
मुद्दत से यही पूछ रहा हूँ मैं मुसलसल
ये किस की बदौलत है जो मिसमार हैं हम लोग
बँटवारा ये कहता है कि हम एक नहीं हैं
तारीख़ ये कहती है कि हमवार हैं हम लोग
गर सच नहीं मालूम तो इतिहास को पढ़ लो
वरना यही समझोगे कि ग़द्दार हैं हम लोग
ऐ हिंद तुझे जब भी ज़रूरत हो बताना
जान अपनी लुटाने को भी तय्यार हैं हम लोग
आँखों से तो अब आँसू मुसल्लों पे गिरे हैं
या रब बता क्या अब भी गुनहगार हैं हम लोग
हम ये भी नहीं कहते कि घर बार लुटा दो
पर थोड़ी मोहब्बत के तो हक़दार हैं हम लोग
हस्साम मुनाफ़िक़ से कहो होश में आए
अब उस के रवय्ये से ख़बरदार हैं हम लोग















