tujh se ik haath kya mila liya hai | तुझ से इक हाथ क्या मिला लिया है

  - Imran Aami

तुझ से इक हाथ क्या मिला लिया है
शहर ने वाक़िआ बना लिया है

हम तो हम थे कि उस परी-रू ने
आइने का भी दिल चुरा लिया है

वर्ना ये सैल-ए-आब ले जाता
शहर को आग ने बचा लिया है

ऐसी नाव में क्या सफ़र करना
जिस ने दरिया को दुख सुना लिया है

कूज़ा-गर ने हमारी मिट्टी से
क्या बनाना था क्या बना लिया है

देखिए पहले कौन मरता है
साँप ने आदमी को खा लिया है

जाने वालों को अब इजाज़त है
हम ने अपना दिया बुझा लिया है

जब कोई बात ही नहीं 'आमी'
आसमाँ सर पे क्यूँँ उठा लिया है

  - Imran Aami

Sad Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Imran Aami

As you were reading Shayari by Imran Aami

Similar Writers

our suggestion based on Imran Aami

Similar Moods

As you were reading Sad Shayari Shayari