ज़ख़्म ईजाद करके देखा है
ख़ुद को बर्बाद करके देखा है
माँगने से तो कुछ नहीं मिलता
हम ने फ़रियाद करके देखा है
कोई फिर लौट कर नहीं आता
हम ने आज़ाद करके देखा है
इक अजब सी ख़ुशी मिली हमको
ख़ुद को नाशाद करके देखा है
दिल ने ज़ख़्मों की बात छेड़ी थी
सो तुझे याद करके देखा है
हिज्र में रक़्स तजरबा है इक
जो तिरे बा'द करके देखा है
ख़त्म होती नहीं है वीरानी
दिल को आबाद करके देखा है
Read Full