मैं नज़्म अधूरी लिख लाई हूँ
तुम इस नज़्म को उनवाँ दे दो
तुम ये नज़्म मुकम्मल कर दो
लेकिन तुम इस गहरी चुप में
क्या इस नज़्म को तुम अंजाम नहीं दोगे
इस को नाम नहीं दोगे
— Janan Malik
तुम इस नज़्म को उनवाँ दे दो
तुम ये नज़्म मुकम्मल कर दो
लेकिन तुम इस गहरी चुप में
क्या इस नज़्म को तुम अंजाम नहीं दोगे
इस को नाम नहीं दोगे
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