mujhe ab aazm | मुझे अब आज़माना फिर पड़ेगा

  - 'June' Sahab Barelvi

मुझे अब आज़माना फिर पड़ेगा
किसी से दिल लगाना फिर पड़ेगा

अभी सब ठीक है पर मुझको डर है
दुखों का इक ज़माना फिर पड़ेगा

वो इस डर से नहीं मिलता किसी से
उसे पीना पिलाना फिर पड़ेगा

मुहब्बत खेल है बस दो मिनट भर
समझ लो आना जाना फिर पड़ेगा

मुहब्बत फिर से करने वालों सुन लो
हर इक वा'दा निभाना फिर पड़ेगा

बुलाती है तो जाऊॅं क्यूँँॅं नहीं मैं
मैं राहत नइँ हूॅं जाना फिर पड़ेगा

ख़ुदाया तू मिले अगले जनम में
तेरे पीछे दिवाना फिर पड़ेगा

  - 'June' Sahab Barelvi

Terrorism Shayari

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