aaj main ne use nazdeek se ja dekha hai | आज मैं ने उसे नज़दीक से जा देखा है

  - Kafeel Aazar Amrohvi

आज मैं ने उसे नज़दीक से जा देखा है
वो दरीचा तो मिरे क़द से बहुत ऊँचा है

अपने कमरे को अँधेरों से भरा पाया है
तेरे बारे में कभी ग़ौर से जब सोचा है

हर तमन्ना को रिवायत की तरह तोड़ा है
तब कहीं जा के ज़माना मुझे रास आया है

तुम को शिकवा है मिरे अहद-ए-मोहब्बत से मगर
तुम ने पानी पे कोई लफ़्ज़ कभी लिक्खा है

ऐसा बिछड़ा कि मिला ही नहीं फिर उस का पता
हाए वो शख़्स जो अक्सर मुझे याद आता है

कोई उस शख़्स को अपना नहीं कहता 'आज़र'
अपने घर में भी वो ग़ैरों की तरह रहता है

  - Kafeel Aazar Amrohvi

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