"तेरे जाने से, आने तक"

तेरे जाने से, तेरे आने तक
इक इंतिज़ार रहता है
दिल बे-क़रार रहता है
तुझ से मिलने का इक जुनून
सिर पर सवार रहता है
अक्सर तेरी यादों से रुख पर कुछ निखार रहता है
बस एक दीद को तकती इन आँखों की
पलकों में मेरी कुछ उभार रहता है
पूछे जो कोई तो चुप रहता हूँ के
क्यूँकर तेरा इतना ख़ुमार रहता है
गर्मी के मौसम में भी मुझ को क्यूँ
तेरा ही एक सो चार बुख़ार रहता है
कोशिश तो करता हूँ
ख़ुश रक्खूँ इस को
फिर भी कमबख़्त दिल ये बीमार रहता है
रुस्वा ही कर दूँ खो ही दूँ तुझ को
ऐसी बातों से दिल ये होशियार रहता है
तुझ से शुरू हुआ और तुझ पे ही ख़त्म
मेरा दिल तुझ पर जाँनिसार रहता है
तेरे बिन आई जो साँसें मुझ को
उन का भी जान मुझ पे उधार रहता है
धड़कन से धड़कन के बीच की घड़ियों में
तेरी ही यादों का शुमार रहता है
तेरे हर इक इशारे पर हद ये पार करने को
मेरा दिल हर पल तैयार ही रहता है
तेरी ही जुस्तजू है
तेरी ही चर्चा
मेरा तो बस ये रोज़गार रहता है
पूछे ख़ुदा अगर तो फिर भी यही कहूँ
तेरा हूँ तेरा
बस ये ख़याल रहता है
तेरे जाने से, तेरे आने तक...

— Karal 'Maahi'

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