फिर मुझे वो बूढ़ी नानी चाहिए
कहती थी जो वो कहानी चाहिए
तिफ़्ल बन फिर से चहक जाऊँगी मैं
बस वही गुड़िया पुरानी चाहिए
मिट्टी के चूल्हे पे पकती रोटियाँ
और मुश्क - ए - शादमानी चाहिए
फूल-तितली ,पेड़ पंछी ,कोह संग
बहते दरिया की रवानी चाहिए
गमले में पौधे ही अब काफ़ी नहीं
घर के बाहर रातरानी चाहिए
रिश्तों की फ़स्लें खिलेंगी,बस उन्हें
प्यार का ही खाद पानी चाहिए
चाँद तारों से करूँ बातें 'प्रिया '
शहर में शब यूँ सुहानी चाहिए
— Priya omar















