वो जो है उनकी मुहब्बत वो हमारी क्या लगे
जो ख़ुदा का भी ख़ुदा हो बोल क्या ओहदा लगे
उन सेे हो मिलना दोबारा ये दुआ भी क्या भला
फिर उसी दीवार में ये सिर हमारा जा लगे
उनके उन सेे भी मिलें और मुस्कुराकर भी मिलें
ख़ुदकुशी भी यानि वो जो ख़ुदकुशी भी ना लगे
उन सेे हमने सीखा ये के कहने का फ़न सीखिए
झूठ भी ऐसे कहो के सुनने में सच्चा लगे
इक इसी उम्मीद पे अब जी रही है कीर्ति
कब वो थक जाए मुसाफ़िर सीने से कब आ लगे
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