vo jo hai unki muhabbat vo hamaari kya lage | वो जो है उनकी मुहब्बत वो हमारी क्या लगे

  - Shayra kirti

वो जो है उनकी मुहब्बत वो हमारी क्या लगे
जो ख़ुदा का भी ख़ुदा हो बोल क्या ओहदा लगे

उन सेे हो मिलना दोबारा ये दुआ भी क्या भला
फिर उसी दीवार में ये सिर हमारा जा लगे

उनके उन सेे भी मिलें और मुस्कुराकर भी मिलें
ख़ुदकुशी भी यानि वो जो ख़ुदकुशी भी ना लगे

उन सेे हमने सीखा ये के कहने का फ़न सीखिए
झूठ भी ऐसे कहो के सुनने में सच्चा लगे

इक इसी उम्मीद पे अब जी रही है कीर्ति
कब वो थक जाए मुसाफ़िर सीने से कब आ लगे

  - Shayra kirti

Ibaadat Shayari

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