"तेरे ज़ेहन में"

तेरे ज़ेहन में क्या चल रहा है
जान मुझे सब पता चल रहा है
मुझ से नज़रें चुरा रही हो तुम
तेरी नज़रों से पता चल रहा है

जो दिल कभी धड़कता था मुझे देख कर
वो अब थम सा चुका है ये पता चल रहा है
वो मोहब्बत जो मेरी थी कभी
आज किसी और की है ये पता चल रहा है

तेरे ज़ेहन में क्या चल रहा है
जान मुझे सब पता चल रहा है
मुझ से नज़रें चुरा रही हो तुम
तेरी नज़रों से पता चल रहा है

ये अश्क न बहाओ मेरे सामने तुम
ये अश्क झूठे है ये पता चल रहा है
जो जुदाई पर मर जाने की बात किया करती थी
आज वो किसी ओर पर मरती है ये पता चल रहा है

तेरे ज़ेहन में क्या चल रहा है
जान मुझे सब पता चल रहा है
मुझ से नज़रें चुरा रही हो तुम
तेरी नज़रों से पता चल रहा है

— Kushal "PARINDA"

More by Kushal "PARINDA"

Other nazm from the same pen

See all from Kushal "PARINDA" →

Nazar Shayari

Shers of nazar.

All Nazar Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling