अकेले चले हैं न रह पाइएगा
कहीं बीच में फिर ठहर जाइएगा
सफ़र दूर का है कहाँ हम सेफ़र है
इन्हीं फ़ासलों से न घबराइएगा
अगर कुछ कहे दिल यही है फ़साना
किसी अजनबी को न समझाइएगा
जिधर भी रहो इस जहाँ में अकेले
लिए फैसले पर न पछताइएगा
कमी कोई हो तो 'मनोहर' बताना
न ही फिर इशारे से समझाइएगा
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