mue sahte sahte jafaa-kaariyaan | मुए सहते सहते जफ़ा-कारियाँ

  - Meer Taqi Meer

मुए सहते सहते जफ़ा-कारियाँ
कोई हम से सीखे वफ़ादारियाँ

हमारी तो गुज़री इसी तौर 'उम्र
यही नाला करना यही ज़ारियाँ

फ़रिश्ता जहाँ काम करता न था
मिरी आह ने बर्छियाँ मारियाँ

गया जान से इक जहाँ ले के शोख़
न तुझ से गईं ये दिल-आज़ारियाँ

कहाँ तक ये तकलीफ़-ए-मा ला-युताक़
हुईं मुद्दतों नाज़-बर्दारियाँ

ख़त-ओ-काकुल-ओ-ज़ुल्फ़-ओ-अंदाज़-ओ-नाज़
हुईं दाम-ए-रह सद-गिरफ़्तारियाँ

किया दर्द-ओ-ग़म ने मुझे ना-उमीद
कि मजनूँ को ये ही थीं बीमारियाँ

तिरी आश्नाई से ही हद हुई
बहुत की थीं दुनिया में हम यारियाँ

न भाई हमारी तो क़ुदरत नहीं
खिंचीं 'मीर' तुझ से ही ये ख़्वारियाँ

  - Meer Taqi Meer

Nature Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Meer Taqi Meer

As you were reading Shayari by Meer Taqi Meer

Similar Writers

our suggestion based on Meer Taqi Meer

Similar Moods

As you were reading Nature Shayari Shayari