ख़ुशी से गुज़ारो बस इक ज़िंदगी है
नज़र भी उतारो बस इक ज़िंदगी है
कोई भी अगर ईंट मारे जो तुम पर
तो पत्थर से मारो बस इक ज़िंदगी है
नहीं एक दम से सुधारो इसे तुम
बिगाड़ो,संवारो बस इक ज़िंदगी है
तो क्या गर मैं मुफ़्लिस हूँ आओगे नइॅं तुम
कभी तो पधारो बस इक ज़िंदगी है
सदा दे सको नइॅं तो अंतःकरण से
ज़रा सा पुकारो बस इक ज़िंदगी है
— Murari Mandal















