main aise mod par apni kahaanii chhod aaya hooñ | मैं ऐसे मोड़ पर अपनी कहानी छोड़ आया हूँ

  - Nadeem Bhabha

मैं ऐसे मोड़ पर अपनी कहानी छोड़ आया हूँ
किसी की आँख में पानी ही पानी छोड़ आया हूँ

अभी तो उस से मिलने का बहाना और करना है
अभी तो उस के कमरे में निशानी छोड़ आया हूँ

बस इतना सोच कर ही मुझ को अपने पास तुम रख लो
तुम्हारे वास्ते मैं हुक्मरानी छोड़ आया हूँ

इसी ख़ातिर मिरे चारों तरफ़ फैला है सन्नाटा
कहीं मैं अपने लफ़्ज़ों के मआनी छोड़ आया हूँ

'नदीम' इस गर्दिश-ए-अफ़्लाक को मैं चाक समझा तो
वहाँ पर ज़िंदगी अपनी बनानी छोड़ आया हूँ

  - Nadeem Bhabha

Rishta Shayari

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