"नहीं मैं नहीं हूँ"

नहीं  मैं नहीं हूँ  न  बद-दिल न ख़ुश-दिल

किसी  की  किसी  भी  तलब  में  नहीं हूँ
न    कोई    रहा    है   तलब-गार   मेरा
यहीं    मुद्दतों   से    रहा    हूँ    मैं   मंज़र
कोई   कर   न    पाया   है  दीदार    मेरा

दिल-ओ-ज़ेहन के दरमियाँ हूँ मैं बिस्मिल
न  जीता   न  हारा   फ़क़त   एक  घाइल
नहीं  मैं  नहीं  हूँ न बद-दिल न ख़ुश-दिल

मैं   कहता   तो   रहता  हूँ  बातें  बहुत-सी
मगर    है    अधूरी    कोई     बात     मेरी
यहाँ   ढूंढता    रहता   हूँ   मैं   ख़ुदी    को
नहीं    होती     मुझ से     मुलाक़ात    मेरी

न   अपने   किसी  दर्द  में  हूँ  मैं  शामिल
न  हो  सकता हूँ अपने मरहम के क़ाबिल
नहीं  मैं  नहीं  हूँ न बद-दिल न ख़ुश-दिल

— Nakul kumar

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