पीते रहें ज़हरीले रिश्तों की शराब
अब और न दीजे झूटे वादों की शराब
है मय-कदा घर के बहुत नज़दीक में
है मय-कदे में सारे ज़ख्मों की शराब
मेरे गले से ये उतरती ही नहीं
कड़वी बहुत है तेरी यादों की शराब
कुछ यूँँ शब-ए-ग़म को किया था मुख़्तसर
कल रात हमनें पी सितारों की शराब
यारों तुम्हारे जाम पानी हो गए
मुझको पिलाओ उसके हाथों की शराब
हमको दिया है शायरी ने ये नशा
हम रोज़ पीते है किताबों की शराब
अब ये गुलाब आँखों में चुभते हैं बहुत
कोई बना दे इन गुलाबों की शराब
दिन में कहीं मर जाती है ये ज़िंदगी
ज़िन्दा हमें रखती है रातों की शराब
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