हर बार लोगों को ये लगातार करती है
कुछ इस क़दर ये लोगों को लाचार करती है
घाइल है करती लोगों को भी इक ही वार में
कुछ यूँ ज़माने भर पे कभी वार करती है
रब के बनाए ख़ून के रिश्ते हैं और ये
उन रिश्तों में हमेशा से तकरार करती है
सुख बस शुरू शुरू में दिया करती है ज़रा
फिर चैन से भी सोना ये दुश्वार करती है
दौलत की लत लगी है ज़माने के लोगों को
लत है कि अच्छे खासों को बीमार करती है
— Piyush Shrivastava















