ab ye aalam hai ki gham ki bhi khabar hoti nahin | अब ये आलम है कि ग़म की भी ख़बर होती नहीं

  - Qabil Ajmeri

अब ये आलम है कि ग़म की भी ख़बर होती नहीं
अश्क बह जाते हैं लेकिन आँख तर होती नहीं

फिर कोई कम-बख़्त कश्ती नज़र-ए-तूफ़ाँ हो गई
वर्ना साहिल पर उदासी इस क़दर होती नहीं

तेरा अंदाज़-ए-तग़ाफ़ुल है जुनूँ में आज कल
चाक कर लेता हूँ दामन और ख़बर होती नहीं

हाए किस आलम में छोड़ा है तुम्हारे ग़म ने साथ
जब क़ज़ा भी ज़िंदगी की चारा-गर होती नहीं

रंग-ए-महफ़िल चाहता है इक मुकम्मल इंक़लाब
चंद शम्ओं के भड़कने से सहर होती नहीं

इज़्तिराब-ए-दिल से 'क़ाबिल' वो निगाह-ए-बे-नियाज़
बे-ख़बर मालूम होती है मगर होती नहीं

  - Qabil Ajmeri

Anjam Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Qabil Ajmeri

As you were reading Shayari by Qabil Ajmeri

Similar Writers

our suggestion based on Qabil Ajmeri

Similar Moods

As you were reading Anjam Shayari Shayari