ऐ वा'दा-शिकन ख़्वाब दिखाना ही नहीं था
क्यूँ प्यार किया था जो निभाना ही नहीं था
इस तरह मेरे हाथ से दामन न छुड़ाओ
दिल तोड़ के जाना था तो आना ही नहीं था
अल्लाह न मिलने के बहाने थे हज़ारों
मिलने के लिए कोई बहाना ही नहीं था
देखो मेरी सर फोड़ के मरने की अदा भी
वर्ना मुझे दीवाना बनाना ही नहीं था
रोने के लिए सिर्फ़ मोहब्बत ही नहीं थी
ग़म और भी थे दिल का फ़साना ही नहीं था
न हम सही कहते न बनी दिल की कहानी
या गोश-बर-आवाज़ ज़माना ही नहीं था
'क़ैसर' कोई आया था मेरी बख़िया-गरी को
देखा तो गरेबाँ का ठिकाना ही नहीं था
— Qaisar-ul-Jafri















