नींद उस रात मुझको नही आई थी
जब तेरे हिज्र ने चोट पहुँचाई थी
पूछा जब माँ ने बेटा तू क्यों रो रहा
तब हक़ीक़त ज़माने की बतलाई थी
मैं तुझे जान से मार सकता न था
इसलिए तेरी तस्वीर दफ़नाई थी
तू ने देखा नहीं था मुझे ग़ौर से
मैं वहाँ था जहाँ तेरी परछाई थी
अपने कमरे में जा के जो देखा 'रचित'
फैली चारो तरफ़ सिर्फ़ तन्हाई थी
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Rachit Sonkar
our suggestion based on Rachit Sonkar
As you were reading Andhera Shayari Shayari