teri aankhon ke parastaar nazar aate hain | तेरी आँखों के परस्तार नज़र आते हैं

  - Rachit Sonkar

तेरी आँखों के परस्तार नज़र आते हैं
हर तरफ़ इश्क़ के बीमार नज़र आते हैं

तोड़ जाते हैं वही लोग हमारा दिल क्यूँ
जो ज़माने में वफ़ादार नज़र आते हैं

अपनी नेकी का फ़साना मैं सुनाऊँ किसको
मुझको हर सम्त गुनहगार नज़र आते हैं

काम आते नहीं कुछ लोग मुसीबत के समय
जो है बेकार वो बेकार नज़र आते हैं

पहले सहरा के सिवा कुछ न नज़र आता था
आप आए हैं तो गुलज़ार नज़र आते हैं

दिन तो तन्हा ही गुज़रता है मगर रात में हम
उसकी बाँहों में गिरफ़्तार नज़र आते हैं

ख़्वाहिश-ए-वस्ल भी रखते है जुदाई के बाद
दिल के आगे सभी लाचार नज़र आते हैं

उसने छोड़ा है किसी और की ख़ातिर मुझको
अब तो मरने के ही आसार नज़र आते हैं

क़त्ल कर दे न कहीं चाहने वालों का 'रचित'
उसके गेसू मुझे तलवार नज़र आते हैं

  - Rachit Sonkar

Valentine Shayari

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