तेरी आँखों के परस्तार नज़र आते हैं
हर तरफ़ इश्क़ के बीमार नज़र आते हैं
तोड़ जाते हैं वही लोग हमारा दिल क्यूँ
जो ज़माने में वफ़ादार नज़र आते हैं
अपनी नेकी का फ़साना मैं सुनाऊँ किसको
मुझको हर सम्त गुनहगार नज़र आते हैं
काम आते नहीं कुछ लोग मुसीबत के समय
जो है बेकार वो बेकार नज़र आते हैं
पहले सहरा के सिवा कुछ न नज़र आता था
आप आए हैं तो गुलज़ार नज़र आते हैं
दिन तो तन्हा ही गुज़रता है मगर रात में हम
उसकी बाँहों में गिरफ़्तार नज़र आते हैं
ख़्वाहिश-ए-वस्ल भी रखते है जुदाई के बाद
दिल के आगे सभी लाचार नज़र आते हैं
उसने छोड़ा है किसी और की ख़ातिर मुझको
अब तो मरने के ही आसार नज़र आते हैं
क़त्ल कर दे न कहीं चाहने वालों का 'रचित'
उसके गेसू मुझे तलवार नज़र आते हैं
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Rachit Sonkar
our suggestion based on Rachit Sonkar
As you were reading Valentine Shayari Shayari