वो घिनौनी तो बात करते हैं
जाति में ज़ात पात करते हैं
बाप ने ही उजाड़ दी ख़ुशियाॅं
पीले जो उसके हाथ करते हैं
वो विरोधी हैं प्यार के लेकिन
कृष्ण राधा की बात करते हैं
'इश्क़ में क़ैद तो नहीं मुमकिन
ज़ुल्म पर एक साथ करते हैं
प्यार से सुन नहीं रहे जिसकी
भागकर वो ही घात करते हैं
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