jaane kaise honge aañsu bahte hain to bahne do | जाने कैसे होंगे आँसू बहते हैं तो बहने दो

  - SALIM RAZA REWA

जाने कैसे होंगे आँसू बहते हैं तो बहने दो
भूली बिसरी बात पुरानी कहते हैं तो कहने दो

 
हम बंजारों को न कोई बाँध सका ज़ंजीरों में

आज यहाँ कल वहाँ भटकते रहते हैं तो रहने दो
 

मुफ़लिस की तो मजबूरी है सर्दी गर्मी बारिश क्या
रोटी के ख़ातिर सारे ग़म सहते हैं तो सहने दो

 
अपने सुख को मेरे दुख के साथ कहाँ ले जाओगे

अलग अलग वो इक दूजे से रहते हैं तो रहने दो
 

मस्त मगन हम अपनी धुन में रहते हैं दीवानों सा
जाने कितने हमको पागल कहते हैं तो कहने दो

 
प्यार में उनके सुध-बुध खोकर ऐसे 'रज़ा' बेहाल हुए

लोग हमें आशिक़ आवारा कहते हैं तो कहने दो

  - SALIM RAZA REWA

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