jisse raushan meri subh-o-shaam hai | जिस सेे रौशन मेरी सुब्ह-ओ-शाम है

  - SALIM RAZA REWA

जिस सेे रौशन मेरी सुब्ह-ओ-शाम है
मेरे होटों पे फ़क़त वो नाम है

इस तरह धड़कन में तेरा नाम है
जिस तरह राधा के दिल में श्याम है

तू मिला मुझको तो सब कुछ मिल गया
ये मुक़द्दर का बड़ा इनआम है

हम किसी से दुश्मनी करते नहीं
दोस्ती तो प्यार का पैग़ाम है

दोस्ती उस सेे मुनासिब है नहीं
शहर की गलियों में जो बदनाम है

लोग कहते हैं बुरा कहते रहें
साफ़-गोई ही हमारा काम है

  - SALIM RAZA REWA

Dost Shayari

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