छोरा था नंदगाँव का हरदिल-दुलारियाँ
कर देवै दूध-छाछ की चोरी-चकारियाँ
टन्ना रिया तख़त पै बैठ कै तू खामखाँ
जमना की रेत काएकू तू ने बिसारियाँ
ऐसी हैं कामयाब अपुन की सफ़ारियाँ
सब हसरताँ ख़लास सलासत की मारियाँ
हम ने जो मौज ली है फ़रिश्तों को ना मिले
जन्नत में कहाँ रेल की छुक-छुक सवारियाँ
— Sanjay Chaturvedi















