लोग कहते हैं ये हालात बदल सकते हैं
इश्क़ के खेल में हम आगे निकल सकते हैं
रास्ते इश्क़ के दुश्वार बहुत हैं लेकिन
फिर भी हम साथ में कुछ देर तो चल सकते हैं
पूछ के देखना अपनों से तुम्हारी ख़ातिर
सूखे पत्तों की तरह आग में जल सकते हैं
दुश्मनों से तो कोई ख़ौफ़ नहीं है मुझ को
मेरे अपने मेरे ख़्वाबों को कुचल सकते हैं
वहशतों ने हमें सख़्ती से जकड़ रक्खा है
अब फ़क़त शे'र सुनाने से बहल सकते हैं
— Shahzan Khan Shahzan'















