दुनिया छोड़ी, जीना मरना छोड़ दिया
उस की ख़ातिर हमनें क्या-क्या छोड़ दिया
जो भी चाहो इस पर तुम तहरीर करो
हम ने काग़ज़ ज़ीस्त का सादा छोड़ दिया
इश्क़ अधूरा मौत की नींद सुलाता है
शुक्र मनाओ तुम को ज़िन्दा छोड़ दिया
वो खिड़की अब और किसी को तकती है
मैं ने भी उस गली में जान छोड़ दिया
जिस को तुम्हारे ख़्वाब मुकम्मल करने थे
उस लड़के को तुम ने अकेला छोड़ दिया
— Shahzan Khan Shahzan'















