नजरे इसलिए तो मैं किसी से मिलाता नहीं था
क्योंकि उसके सिवा जहन में कोई आता नहीं था
मैं याद में उसकी दिन-रात पागल था और
वो समझती थी के मेरा कुछ जाता नहीं था
मान जाता था ख़ुद ही मैं रूठ के अपने आप
बचपन में भी मुझको कोई मनाता नहीं था
छीन लेते थे लोग मुझ सेे मेरी हर चीज, इस
लिए
उसे खोने का डर मेरे दिल से जाता नहीं था
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by karan singh rajput
our suggestion based on karan singh rajput
As you were reading Terrorism Shayari Shayari